ब्राह्मणों के छः काम हैं – पठन-पाठन, दान लेना-दान देना, यज्ञ करना -यज्ञ कराना । यदि आप दान देना चाहते हैं और किसी ऐसे व्यक्ति को देना चाहते हैं जो आपके धन का सदुपयोग करके किसी अच्छे काम में लगा दे तो जरूर आप हमें सपोर्ट करें। सुयोग्य व्यक्ति ही धन का सदुपयोग कर सकता है। सहयोग राशि मात्र 21 Rs or $1 for foreign countries.

ब्राह्मण का बल क्षमा है क्योंकि वह इस नियम से परिचित है कि जगत को जो भी दो वह अंततः खुद पर ही लौट आता है। बात बात पर श्राप देनें वाले दुर्वासा इसीलिये दुर्वासा हैं, अपनी तपस्या आप ही श्राप देकर भंग करनें वाले। ब्राह्मण आदर्श हैं वशिष्ठ ।

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