काश्मीर शैव दर्शन “शिव सूत्र”

ओंम स्वप्रकाश आनंद—स्वरूप भगवान शिव को नमन (अब) शिवसूत्र (प्रारंभ) चैतन्‍य आत्मा है। ज्ञान बंध है। यौनिवर्ग और कला शरीर है। उद्यम ही भैरव है। शक्‍तिचक्र के संधान से विश्वक्त संहार खो जाता है। जाग्रत स्‍वप्‍न और सुषुप्‍ति— इन तीनों अवस्थाओं को पृथक रूप से जानने से तुर्यावस्था का भी ज्ञान हो जाता है ज्ञान का बना रहना ही जाग्रत अवस्था है। विकल्प ही स्‍वप्‍न हैं।’’ अविवेक अर्थात स्व—बोध का अभाव मायामय सुषुप्‍ति है। तीनों का भोक्ता वीरेश कहलाता है। विस्मय योग की भूमिका है। स्वयं में स्थिति ही शक्ति है। वितर्क अर्थात विवेक आत्मज्ञान का साधन है। अस्तित्व का … Continue reading काश्मीर शैव दर्शन “शिव सूत्र”

बुद्ध कथा

1- मन सभी प्रवत्तियों का पुरोगामी है,मन उनका प्रधान है,वे मनोमय हैं,यदि कोई दोषयुक्त मन से बोलता है या कर्म करता है तो दुख उसका अनुसरण वैसे ही करता है जैसे गाड़ी का चक्का ,खींचनें वाले बैलों के पैर का ।उसनें मुझे डांटा,मुझे मारा,मुझे जीत लिया,मेरा लूट लिया-जो ऐसी गांठे मन में बनाये रखते हैं,उनका बैर शांत नहीं होता ।उसनें मुझे डांटा,मुझे मारा,मुझे जीत लिया,मेरा लूट लिया-जो ऐसी गांठे मन में नहीं बनाये रखते हैं,उनका बैर शांत हो जाता है ।इस संसार में बैर से बैर कभी शांत नहीं होता । अबैर से ही वैर शांत होता है, यही सनातन … Continue reading बुद्ध कथा

विज्ञान भैरव तंत्र

1- हे देवी, यह अनुभव दो श्वास के बीच घटित हो सकता है। श्वास के भीतर आने के पश्चात और बाहर लौटने के ठीक पूर्वश्रेयश है, कल्याण है। 2- ” या जब कभी अन्तः श्वास और बहिर्श्वांस एक दूसरे में विलीन होती हैं , उस क्षण में ऊर्जारहित , ऊर्जापूरित  केन्द्र को स्पर्श करो . ”  3- ” जब श्वास नीचे से ऊपर की ओर मुड़ती है , और फिर जब श्वास ऊपर से नीचे की ओर मुड़ती है — इन दो मोड़ों के द्वारा उपलब्ध हो . “ 4- ” या जब श्वास पूरी तरह बाहर गई है और … Continue reading विज्ञान भैरव तंत्र

नारद भक्ति सूत्र

अब भक्ति की व्याख्या करेंगे l वह ईश्वर के प्रति परम प्रेम रूपा है।  और अमृतस्वरूपा भी है। जिसको पाकर मनुष्य सिद्ध हो जाता है,अमर हो जाता है,तृप्त हो जाता है। जिसके प्राप्त होने पर मनुष्य न किसी वस्तु की इच्छा करता है न किसी बिछुड़े व्यक्ति या वस्तु के लिये शोक प्रकट करता है,न द्वेष करता है,न किसी वस्तु में आसक्त होता है और न उसे उत्साह होता है। जिसको जानकर मनुष्य उन्मत्त हो जाता है,स्तब्ध हो जाता है,आत्माराम बन जाता है। वह कामनायुक्त नहीं है। क्योंकि वह निरोध स्वरूपा है। लौकिक और वैदिक कर्मों के त्याग को निरोध … Continue reading नारद भक्ति सूत्र

सम्पूर्ण विश्व के कोतवाल की सदा जय हो । 🙏🏻जय बाबा विश्वनाथ🙏🏻

पुलिस में जब भी कोई रिश्वत की मांग करे तो यह चित्र दिखाकर उनका पूजन कर दें । Continue reading सम्पूर्ण विश्व के कोतवाल की सदा जय हो । 🙏🏻जय बाबा विश्वनाथ🙏🏻

ओशो की ओर से नए साल का संदेश

ओशो, इस नए साल के दिन मानवता के लिए आपका क्या संदेश है? मेरा संदेश सरल है।  मेरा संदेश एक नया आदमी है, होमो नोवस।  मनुष्य की पुरानी अवधारणा या तो/या की थी;  भौतिकवादी या अध्यात्मवादी, नैतिक या अनैतिक, पापी या संत।  यह विभाजन, विभाजन पर आधारित था।  इसने एक सिज़ोफ्रेनिक मानवता का निर्माण किया।  मानवता का सारा अतीत रुग्ण, अस्वस्थ, विक्षिप्त रहा है।  तीन हजार वर्षों में पांच हजार युद्ध लड़े जा चुके हैं।  यह बिलकुल पागल है;  यह अविश्वसनीय है।  यह मूर्ख, मूर्ख, अमानवीय है। एक बार जब आप मनुष्य को दो भागों में बांट देते हैं, तो … Continue reading ओशो की ओर से नए साल का संदेश

New Year Message From Osho

Osho, what is your message to humanity on this new year’s day? My message is simple. My message is a new man, homo novus. The old concept of man was of either/or; materialist or spiritualist, moral or immoral, sinner or saint. It was based on division, split. It created a schizophrenic humanity. The whole past of humanity has been sick, unhealthy, insane. In three thousand years, five thousand wars have been fought. This is just utterly mad; it is unbelievable. It is stupid, unintelligent, inhuman. Once you divide man in two, you create misery and hell for him. He can … Continue reading New Year Message From Osho

सरकारी नौकरी में रहकर पॉलिटिक्स करनें वाले को राजा एक ही सजा देता है मौत अर्थात शहीदी ।

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कर्णजीवातुभूतम् (कीमिया-ए-इश्क़)

-1- विरञ्चिना विरचिता सुन्दरि! त्वं न सुन्दरी।तथा, यथा मनस्तूल्या मया त्वं सुन्दरीकृता॥ हे सुन्दरी,ब्रह्मा ने भी तुम्हें उतना सुन्दर नहीं बनाया हैजितना कि मैंने अपने मन की कूँची से सँवारकरतुम्हें दर्शनीय बना दिया है -2- त्वं मनोमुकुरे यावन्मयाकल्प्य विलोकिता।न काचदर्पणे तावत् त्वयात्मापि निरीक्षितः॥ खूब सजा सँवार करहृदय के दर्पण मेंजितना ध्यान से मैंने तुम्हें निहारा […] कर्णजीवातुभूतम् (कीमिया-ए-इश्क़) Continue reading कर्णजीवातुभूतम् (कीमिया-ए-इश्क़)

ब्राह्मणों के छः काम हैं – पठन-पाठन, दान लेना-दान देना, यज्ञ करना -यज्ञ कराना । यदि आप दान देना चाहते हैं और किसी ऐसे व्यक्ति को देना चाहते हैं जो आपके धन का सदुपयोग करके किसी अच्छे काम में लगा दे तो जरूर आप हमें सपोर्ट करें। सुयोग्य व्यक्ति ही धन का सदुपयोग कर सकता है। सहयोग राशि मात्र 21 Rs or $1 for foreign countries.

सहयोग राशि मात्र 21 रुपये or $1 for foreigners swamiashutoshji@upi Donate If you like my free advice. Continue reading ब्राह्मणों के छः काम हैं – पठन-पाठन, दान लेना-दान देना, यज्ञ करना -यज्ञ कराना । यदि आप दान देना चाहते हैं और किसी ऐसे व्यक्ति को देना चाहते हैं जो आपके धन का सदुपयोग करके किसी अच्छे काम में लगा दे तो जरूर आप हमें सपोर्ट करें। सुयोग्य व्यक्ति ही धन का सदुपयोग कर सकता है। सहयोग राशि मात्र 21 Rs or $1 for foreign countries.

ब्राह्मण का बल क्षमा है क्योंकि वह इस नियम से परिचित है कि जगत को जो भी दो वह अंततः खुद पर ही लौट आता है। बात बात पर श्राप देनें वाले दुर्वासा इसीलिये दुर्वासा हैं, अपनी तपस्या आप ही श्राप देकर भंग करनें वाले। ब्राह्मण आदर्श हैं वशिष्ठ ।

क्षमः यशः क्षमा दानं क्षमः यज्ञः क्षमः दमः।क्षमा हिंसा: क्षमा धर्मः क्षमा चेन्द्रियविग्रहः॥अर्थात्- क्षमा ही यश है क्षमा ही यज्ञ और मनोनिग्रह है ,अहिंसा धर्म है. और इन्द्रियों का संयम क्षमा के ही स्वरूप है क्योंकि क्षमा ही दया है और क्षमा ही पुण्य है क्षमा से ही सारा जगत् टिका है अतः जो मनुष्य क्षमावान है वह देवता कहलाता है.  वही सबसे श्रेष्ठ है. वशिष्ठ और विश्वामित्र के बीच श्रेष्ठता का निर्णय इसी गुण ने किया था.  ब्रह्मा जी विश्वामित्र के घोर तप से प्रसन्न होकर प्रकट हुए और उन्हें राजर्षि कहकर संबोधित किया.  विश्वामित्र इस वरदान से संतुष्ट … Continue reading ब्राह्मण का बल क्षमा है क्योंकि वह इस नियम से परिचित है कि जगत को जो भी दो वह अंततः खुद पर ही लौट आता है। बात बात पर श्राप देनें वाले दुर्वासा इसीलिये दुर्वासा हैं, अपनी तपस्या आप ही श्राप देकर भंग करनें वाले। ब्राह्मण आदर्श हैं वशिष्ठ ।

🙏🙏🙏 Greatest Tribute will be to Mr. Ramjethmalani when black money will come india🙏🙏🙏

Indian black money In India, black money is funds earned on the black market, on which income and other taxes have not been paid. Also, the unaccounted money that is concealed from the tax administrator is called black money. The black money is accumulated by the criminals, smugglers, hoarders, tax-evaders and other anti-social elements of society. Around 22,000 crores of rupees are supposed[citation needed] to have been accumulated by the criminals for vested interests, though writ petitions in the supreme court estimate this to be even larger, at ₹300 lakh crores.[1] Map of tax havens, using the 2007 proposed “Stop Tax Haven Abuse Act“ The total amount of black money … Continue reading 🙏🙏🙏 Greatest Tribute will be to Mr. Ramjethmalani when black money will come india🙏🙏🙏

एक छोटा सा संदेश कुँवारों के नाम।

एक छोटा सा संदेश जिसे कोर्ट द्वारा तो समाधान कर दिया गया है लेकिन हमारी पुरानी आदतों के ना बदलनें के कारण अनेंक समस्याओं की जननी हो गयी है। आदतें बदलें क्यूँकि देश बदल गया है। संविधान का राज है। महिलायें भी बराबरी की हकदार हैं। 1-पुरानें समय में कन्यादान किया जाता था आजकल दामाद गोद ले लिये जाते हैं,जिन्दगी भर दामाद वही करेगा जो लड़की और सास ससुर कहेंगे। 2-दामाद लोगों को भी कहना चाहिये कि लड़की के पिता की आधी सम्पत्ति उसकी भी है राजी से दे रहे तो ठीक नहीं तो कोर्ट से मंजूर करा लेंगे। 3-कुँवारे … Continue reading एक छोटा सा संदेश कुँवारों के नाम।

हर देश हर धर्म हर जाति हर वर्ग के लिये कथा “ऋषयश्च कलन्दराः संस्थानम्”

ब्राह्मणों के लिये उपनिषद कथा क्षत्रियों के लिये रामकथा वैश्यों के लिये बिजनेस माड्यूल एवं शेयर मार्केट ज्ञान हिन्दी अंग्रेजी दोनों में। यादवों के लिये भागवत कथा। SC/ST के लिये बुद्ध धम्म कथा। ईसाइयों के लिये क्राइस्ट कथा । मुस्लिमों के लिये कलन्दर कथा उर्दू और फारसी भाषा में। सिखों के लिये “नामकथा” जैनों के लिये “जिनकथा” पारसियों के लिये “जरथुस्त्रकथा” ऋषयश्च कलन्दराः संस्थानऐसा मल्टीटैलेंटिड संस्थान है जिसके पास दुनिया के हर धर्म और जाति को सिखाने के लिये कुछ ना कुछ है आप जिस भी धर्म या जाति के हो और जो ज्ञान सुनना चाहते हो वही अपनें पसंद … Continue reading हर देश हर धर्म हर जाति हर वर्ग के लिये कथा “ऋषयश्च कलन्दराः संस्थानम्”

RISHIS & QALANDARS IAS ACADEMY

ऋषयश्च कलन्दराः संस्थानम् का वह कार्य जो विद्यार्थियों को सिविल सेवा के लिये तैयार करेगा वह सब कार्य इस “RISHIS & QALANDARS IAS ACADEMY” के तहत होगा । यह एक स्वतंत्र संस्था होगी। Continue reading RISHIS & QALANDARS IAS ACADEMY

पहली किताब “दयानंद पर पुनर्विचार”- स्वामी आशुतोष।

“दयानन्द पर पुनर्विचार” यह सनातन संस्कृति है कि समय समय पर हम अपनें महापुरूषों पर पुनर्विचार करते रहें और जो पुराना हो गया है उसे बदलते रहें और नये विचारों को जोड़ते रहें। ऋषयश्च कलन्दराः संस्थानम् की ओर से इस पब्लिकेशन की स्थापना की गयी है यह पब्लिकेशन स्वतंत्र रूप से कार्य करेगा जिसका उद्देश्य संस्कृत एवं फारसी धर्मग्रन्थ तथा साहित्य को लोगों तक पहुँचाना एवंसमाज में जागरूकता के लिये एक पत्रिका का प्रकाशन तथा कुछ ऐसी पुस्तकें भी प्रकाशित करेगा जो कि सामान्य पढे लिखे व्यक्ति से अपेक्षा की जाती है कि यह उसे पता हो। Continue reading पहली किताब “दयानंद पर पुनर्विचार”- स्वामी आशुतोष।

स्वर्ग पानें के लिये नियमित यज्ञ करें।(स्वर्गकामो यजेत) यज्ञ से संसार मिलता है मोक्ष नहीं।

१. यज्ञो वै श्रेष्ठतमं कर्म ।। ( शतपथ ब्राह्मण )यज्ञ दुनिया का सर्वश्रेष्ठ कर्म है । २. यज्ञो वै कल्पवृक्षः ।।यज्ञ कामनाओं को पूर्ण करनेवाला है । ३. ईजानाः स्वर्गं यन्ति लोकम् ।। ( अथर्ववेद १८.४.२)यज्ञकर्त्ता स्वर्ग ( सुख ) को प्राप्त करते है । ४. अग्निहोत्रं जुहूयात् स्वर्गकामः ।।स्वर्ग की अभिलाषा रखने वाले व्यक्ति यज्ञ करें । ५. होतृषदनम् हरितम् हिरण्यम् ।।यज्ञ वाले घर धन – धान्य से पूर्ण होता है । ६. यज्ञात् भवति पर्जन्यः ।।यज्ञ से वर्षा होती है । ७. इयं ते यज्ञियाः तनू ।।ये तेरा शरीर यज्ञादि शुभ कर्मों के लिए है । ८ . … Continue reading स्वर्ग पानें के लिये नियमित यज्ञ करें।(स्वर्गकामो यजेत) यज्ञ से संसार मिलता है मोक्ष नहीं।

‘ऋषयश्च कलन्दराः’ संस्थानम् موسسه حکما و تقویم هاموسسه حکما و تقویم ها

सरस्वती पूजन दिवस 2021 के पावन अवसर पर फाउन्डेशन की स्थापना 🙏🏻सरस्वती पूजन दिवस के पावन अवसर पर फाउन्डेशन की स्थापना🙏🏻 फाउन्डेशन का उद्देश्य संस्कृत एवं फारसी भाषाओं का प्रचार प्रसार,हिन्दू मुस्लिम एकता की भावना विकसित करना, हिन्दू – मुस्लिम संस्कृति एवं कला का प्रचार प्रसार | संस्कृत एवं फारसी साहित्य को प्रोत्साहन एवं संवर्धन। संस्कृत साहित्य के शास्त्र लोगों तक पहुँचाना ताकि हिन्दी साहित्य में जो दिशाहीनता आ गई है उसे दूर करना। इसी प्रकार लोगों तक फारसी साहित्य पहुँचाना और उर्दू भाषा का मार्गदर्शन करना। संस्था के आदर्श के रूप में हिन्दुओं की ओर से सप्तर्षि- 1-कश्यप,2-अत्रि 3-वशिष्ठ … Continue reading ‘ऋषयश्च कलन्दराः’ संस्थानम् موسسه حکما و تقویم هاموسسه حکما و تقویم ها

News Paper EDITORIAL AUDIO HEADLINES 25-11-2020

1-RBI Drops a Bombshell-Raghuram Rajan and Viral Acharya-Times of india.2-Shunshine Sector-Times of India3-Protect Art-Times of India4-But Bank aren’t Business-Satya Ghosh-The Economic Times5-Protecting article 32-Upendra Baxi-The indian Express6-Open Cautiously-The indian Express7-Say’No’ to Corporate Houses in Indian Banking-T.T. Ram Mohan-The Hindu8-love in the Time of Hinduttva.-Rama Shrinivas-The Hindu9- Daring to love beyond socital limits-V.Geetha-The Hindu Continue reading News Paper EDITORIAL AUDIO HEADLINES 25-11-2020

हिन्दी अखबार सम्पादकी आडियो 25-11-2020

This video is about हिन्दी अखबारों से सम्पादकीय। 1-लव जिहाद पर कानून असंवैधानिक हो सकता है।-डॉ वेद प्रताप वैदिक2- भारत सिर्फ एक राष्ट्र मात्र नहीं,यह सम्पूर्ण विचारधारा है।-मनोज मुंतशिर-दैनिक भाष्कर3-ऊर्जा में आत्मनिर्भरता का ऊँचा दाँव -डॉ अजय खेमरिया-दैनिक जागरण4-आधी आबादी को दुनिया के किस कोने में सुकून है।-ऋतु सारस्वत-हिन्दुस्तान5-अभिव्यक्ति पर अंकुश-जनसत्ता Continue reading हिन्दी अखबार सम्पादकी आडियो 25-11-2020

कुछ अटक गये भाषाओं में•

कुछ अटक गए भाषाओं में,कुछ देश धर्म मुल्लाओं में,कुछ भटके तीर्थ हजारों में,काशी काबा गिरनारों में,अब कौन राह बतलायेगामूढों को कौन जगाएगाजो गीता पाठ दोहराएंगेवह बंसी नहीं सुन पाएंगेजो बाहर दर्शन को जाएंगेउर में नहीं ज्योति को पाएंगेसामाजिक उत्थान हुआ परअटका अब धर्म विचारों मेंअब कौन राह बतलायेगामूढों को कौन जगाएगावे कहते हैं कि पा ही लिया हैपाने को जो भी था पानापुस्तक पढ़ कर स्वयं को जानाछंद शास्त्र से काव्य बखानाअब तोते रसिक कहायेंगेरसौ वै स: ये पढायेंगेअब कौन राह बतलायेगामूढों को कौन जगाएगा SWAMI ASHUTOSH Continue reading कुछ अटक गये भाषाओं में•

साहित्य रीता धर्म बिन,धर्म रीता काव्य बिन🙏

साहित्य रीता धर्म बिन,धर्म रीता काव्य बिन,कोई कृष्ण बुलाया जाये,मिलन तो इनका कराया जाये,वैदिक ऋषियों से बिछुड़े हैं,कालिदास भवभूति दण्डिन,भारवि भर्तहरि श्री हर्ष को,वेदपाठ करवाया जाये,जप तप योग में सनी हुयी,काव्य पंक्तियां रचे कोई,सीता का तप तो बहुत गाया,अब शकुन्तला को गाया जाये,भोग और योग में हो मिलन,ऐसा धर्म सिखाया जाये,कनक कामिनी और विरक्ति,जनक कोई बुलवाया जाये,शंकर भाष्य के लंबे चेहरे,वेद गाम्भीर्य से भरे हुये,वन से यौवन तक लाया जाये,शंकर’शंकर”को मिलाया जाये,साहित्य रीता धर्म बिन,धर्म रीता काव्य बिन,कोई कृष्ण बुलाया जाये,मिलन तो इनका कराया जाये, ‘-आदिशंकराचार्य“-शिव SWAMI ASHUTOSH Continue reading साहित्य रीता धर्म बिन,धर्म रीता काव्य बिन🙏

झूठे बुद्धत्व का दावा करने वाले नटवरलाल और ओशो पर तरह तरह के आक्षेप लगानें वालों को लामा कर्मपा का यह संदेश अवश्य पढ़ना चाहिये|

Govind Siddharth’s Visit to the 16th Karmapa The 16th Karmapa speaks to Govind Siddharth about Osho The following interview was published at the end of one of Osho’s very early books, The Silent Explosion, which has since gone out of print. Puroshottama, who had also met the Karmapa personally during his travels, reminded us of this very extraordinary interview.16th Karmapa Govind Siddharth, would you please tell us in detail about your visit to the Monastery of the Tibetan Lama, His Holiness Lama Karmapa? Darjeeling is full of monasteries. When one approaches Darjeeling, many monasteries are seen on the way. Many … Continue reading झूठे बुद्धत्व का दावा करने वाले नटवरलाल और ओशो पर तरह तरह के आक्षेप लगानें वालों को लामा कर्मपा का यह संदेश अवश्य पढ़ना चाहिये|

मन बुद्धि पर संस्कृत श्लोक

विचार रूपी मन इस  रचनात्मक का  सिद्धांत कहता है कि ‘विश्व में किसी भी वस्तु का भौतिक निर्माण होने से पहले उसका वैचारिक निर्माण होता है।’ यह मौलिक विचार नियम है।  विचार रूपी मन के  एक उदाहरण से समझे— सरोवर कीचडरहित हो तो शोभा देता है, दुष्ट मानव न हो तो सभा, कटु वर्ण न हो तो काव्य और विषय न हो तो मन शोभा देता है । पंकैर्विना सरो भाति सभा खलजनै र्विनाकटुवणैर्विना काव्यं मानसं विषयैर्विना ॥ सरोवर कीचडरहित हो तो शोभा देता है, दुष्ट मानव न हो तो सभा, कटु वर्ण न हो तो काव्य और विषय न हो तो मन शोभा … Continue reading मन बुद्धि पर संस्कृत श्लोक

विवेकानन्द और उनकी पठन क्षमता

ऐसा हुआ, विवेकानंद एक बड़े विद्वान के साथ ठहरे हुए थे। उनका नाम था, देवसेन। बहुत बड़ा विद्वान, जिसने संस्‍कृत शास्‍त्रों का पश्‍चिमी भाषाओं में अनुवाद किया। देवसेन उपनिषदों के अनुवाद में संलग्‍न था—और वह सर्वाधिक गहरे अनुवादकों में से एक था। एक नई पुस्‍तक प्रकाशित हुई थी। विवेकानंद ने पूछा, क्‍या मैं इसे देख सकता हूं? क्‍या मैं इसे पढ़ने के लिए ले सकता हूं? देवसेन ने कहा, हां-हां जरूर ले सकते हो, मैंने इसे बिलकुल नहीं पढ़ा है।कोई आधे घंटे बाद विवेकानंद ने पुस्‍तक लौटा दी। देवसेन को तो भरोसा न हुआ। इतनी बड़ी पुस्‍तक पढ़ने के लिए … Continue reading विवेकानन्द और उनकी पठन क्षमता

How to be celibate? सहज ब्रह्मचर्य

OSHO,I HAVE TAKEN THE VOW TO REMAIN A CELIBATE MY WHOLE LIFE, BUT WHY DO I STILL SUFFER FROM SEXUAL THOUGHTS, FANTASIES AND DREAMS? Swami Nityananda Giri, IT is NATURAL – it is because of your vow. Nobody can change one’s life by force. The vow simplyis a violent act against yourself. It will only repress your sex, and the repressed will take revenge;it will come on again and again and again. You will push it from one door, it will enter from anotherdoor. You cannot get rid of it so easily, so cheaply.Just the other day, Morarji Desai revealed … Continue reading How to be celibate? सहज ब्रह्मचर्य

“New Year’s Message to Humanity”- OSHO

Q. what is your message to humanity on this new year’s day? [1-January-1979] My message is simple. My message is a new man, homo novus. The old concept of man was of either/or; materialist or spiritualist, moral or immoral, sinner or saint. It was based on division, split. It created a schizophrenic humanity. The whole past of humanity has been sick, unhealthy, insane. In three thousand years, five thousand wars have been fought. This is just utterly mad; it is unbelievable. It is stupid, unintelligent, inhuman. Once you divide man in two, you create misery and hell for him. He can never … Continue reading “New Year’s Message to Humanity”- OSHO

सभी काव्य परमात्मा का है..ओशो

जय ओशो..🌞🌞 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 सभी काव्य परमात्मा का है.. तीन तरह के कवि होते हैं। एक, जिसको परमात्मा की झलक स्वप्न में मिलती है। जिनको हम साधारणतः कवि कहते हैं–कि सुमित्रानंदन पंत कि मिल्टन कि एजरा पाउंड–इनको स्वप्न में झलक मिलती है। इन्होंने जाग कर परमात्मा नहीं देखा है; नींद-नींद में, सोए-सोए कोई भनक पड़ गई है कान में। उसी भनक को ये गीत में बांधते हैं। फिर भी इनके गीत में माधुर्य है। इनके जीवन में परमात्मा नहीं है। फिर भी इनके गीत में माधुर्य है। इनके जीवन में परमात्मा नहीं है। कभी किसी गुलाब के फूल में थोड़ी सी … Continue reading सभी काव्य परमात्मा का है..ओशो

आत्ममुग्ध संस्कृतज्ञ आत्मज्ञानियों के लिये|

जय ओशो.🌞🌞 प्रश्न : हमारे केंद्र में तीन साधक साक्षी के मार्ग पर गतिमान हैं। उनमें से मैं भी हूं। मैं इन लोगों से कहता हूं कि अब हमारे लिए कोई भी ध्यान करने की जरूरत नहीं है। अब तो होशपूर्वक सदा सब काम करना ही ध्यान है। लेकिन अन्य दो मित्रों का कहना है कि नटराज ध्यान करने से होश और भी बढ़ेगा। मैंने सब ध्यान बंद कर दिया है। कृपा कर इस दिशा में हमारा मार्गदर्शन करें। पूछा है सागर के स्वामी सत्य भक्त ने। सत्य भक्त! तुममें मैं मूढ़ता को रोज—रोज बढ़ते देख रहा हूं। तुम जितने … Continue reading आत्ममुग्ध संस्कृतज्ञ आत्मज्ञानियों के लिये|

LEIBNIZ

Leibniz Previous Year questions 2018 Is there any place for freedom in leibniz’s philosophy ,when he speaks of ‘Pre-established’ harmony.Discuss? 2015 explain leibnitz’s principal of identity of indiscernibles? 2014 Does leibniz’s theory of pre-established harmony necessarily lead to determinism? Discuss 2013 Give a critical account of leibnitz’s principal of the identity of indiscernibles? 2012 Does leibnitz succeed in combining the machanical with the teleological view of the world? explain his theory of pre established harmony? 2010 what is the basic difference between leibniz and kant on the concept of space and time.? 2009 Compare the views of leibniz and Hume … Continue reading LEIBNIZ

SPINOZA

Spinoza Previous year questions 2019 What do you understand by spinoza’s statement that what is cannot be other than what it is? 2013 write a short critical essey on spinoza’s conception of freedom of the indivisual.? 2011 Is the concept of freedom consistant with the theory of determinism of spinoza? 2010 why does spinoza think that God alone is absolute real? explain. 2009 Compare the views of spinoza amd stre on freedom ? 2006 Explain spinoza’s theory of substance? 2002 state and critically examine spinoza’s doctrine of identity of substance,God and Nature. 1997 Explain the nature of substance and its … Continue reading SPINOZA

DESCARTES

Descartes Previous year questions *2018*what is the reason for the difference in the definitions and classifications of substances made by Descartes,Spinoza and Leibniz in spite of the fact that they all belonged to the rationalist school of thought ? Discuss. *2017 *what according to Descartes is a clear and a distinct idea? what is the epistemological status of clear and distinct ideas? Does this account help descartes prove that material objects exist? 2016 Examine kant’s criticism on Descartes view of self? 2016 Discuss the various stances on God taken by Rationalist and Empirisists? 2015 Does Descartes cagito principal entail that … Continue reading DESCARTES

Why One Should Meditate??

Why Meditate? Meditation is a way of settling in oneself, at the innermost core of your being. Once you have found the center of your existence, you will have found both your roots and your wings. The roots are in existence, making you a more integrated human being, an individual. And the wings are in the fragrance that is released by being in contact with existence. The fragrance consists of freedom, love, compassion, authenticity, sincerity, a sense of humor, and a tremendous feeling of blissfulness. The roots make you an individual, and the wings give you the freedom to love, to be … Continue reading Why One Should Meditate??

Protected: सौ सौ जूता खायें,तमासा घुस के देखैं-_दिल्ली विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग एक रिपोर्ट|

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Protected: RTI में खुलासा कि संस्कृत विभाग दिल्ली विश्वविद्यालय में कोई असफल नहीं होता क्यूँकि सिलेक्शन पहले से ही तय होते हैं।

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कुरान शरीफ: ओशो

कुरान शरीफ: इस्‍लाम उस परंपरा का हिस्‍सा है जिससे यहूदी और ईसाई धर्म पैदा हुआ। उसे इब्राहीम का धर्म कहते है। इब्राहीम का बेटा था इस्माइल। इब्राहीम को दूसरी पत्‍नी सारा से एक बेटा हुआ—इसाक। सारा के सौतेले पन से इस्माइल को बचाने की खातिर इब्राहीम इस्माइल को लेकर अरेबिया के एक गांव मक्‍का चले गए। उनके साथ एक इजिप्‍त का गुलाम हगर भी था। इब्राहीम और इस्माइल ने मिलकर क़ाबा का पवित्र आश्रम बनाया। ऐसा माना जाता था कि क़ाबा आदम का मूल आशियाना था। काबा में एक पुराना धूमकेतु गिरकर पत्‍थर बन गया था। कुरान के जिक्र के … Continue reading कुरान शरीफ: ओशो

पतंजलि योगसूत्र

अब योग का अनुशासन NOW THE DISCIPLINE OF YOGA. योग मन की समाप्ति है। YOGA IS THE CESSATION OF MIND. तब साक्षी स्वयं में स्थापित हो जाता है। THEN THE WITNESS IS ESTABLISHED IN ITSELF. अन्य अवस्थाओं में मन की वृत्तियों के साथ तादात्म्य हो जाता है। IN THE OTHER STATES THERE IS IDENTIFICATION WITH THE MODIFICATIONS OF THE MIND. मन की वृत्तियां पांच हैं।वे क्लेश का स्रोत भी हो सकती हैं और अक्लेश का भी। THE MODIFICATIONS OF THE MIND ARE FIVE. THEY CAN BE EITHER A SOURCE OF ANGUISH OR OF NON-ANGUISH. ये वृत्तियां हैं प्रमाण(सम्यक ज्ञान),विपर्यय(मिथ्या ज्ञान),विकल्प(कल्पना),निद्रा … Continue reading पतंजलि योगसूत्र

इससे पहले कि पंच विकारों से आविष्ट होऊँ,…

इससे पहले कि पंच विकारों से आविष्ट होऊँ, मैनें पंच भावनाओं का अभ्यास कर के जीवन धन्य कर लिया। इससे पहले कि मैं वासना से आविष्ट होऊं, मैंनें उनको देवी समझकर चरण छू लिये। इससे पहले कि मैं क्रोध से आविष्ट होऊँ, मैंनें उनको करूणामयी निगाहें डालकर मुक्तकर दिया। इससे पहले कि मैं लोभ से आविष्ट होऊँ, मैंनें जीभर सब लुटा दिया जो भी मेरे पास था। इससे पहले कि मैं मोह से आविष्ट हो जाऊँ, मैंनें उनकी स्वतन्त्रता का आदर करके मुक्त कर दिया। इससे पहले कि अहंकार से आविष्ट हो जाऊँ, सब कुछ परमात्मा का प्रसाद समझकर समर्पण … Continue reading इससे पहले कि पंच विकारों से आविष्ट होऊँ,…

मर्यादा पुरुषोत्तम राम नें भी किया प्रेम विवाह..और आपनें?

नहीं राम बिन ठांव-(प्रश्नोंत्तर)-ओशो प्रवचन-सातवां दिनांक 31 मई सन् 1974 ओशो आश्रम, पूना। सीता: प्रेम की अनन्य घटना ध्यान और प्रेम करीब-करीब एक ही अनुभव के दो नाम हैं। जब किसी दूसरे व्यक्ति के संपर्क में ध्यान घटता है, तो हम उसे प्रेम कहते हैं। और जब बिना किसी दूसरे व्यक्ति के, अकेले ही प्रेम घट जाता है, तो उसे हम ध्यान कहते हैं। प्रश्न: भगवान, आपके अनुसार ही, प्रेमी-प्रेमिका का प्रेम तो टिकाऊ भी होता है, लेकिन पति-पत्नी का नहीं। और कल आपने कहा कि राम और सीता का प्रेम अपने आप में इतना पूर्ण था कि वे एक-दूसरे … Continue reading मर्यादा पुरुषोत्तम राम नें भी किया प्रेम विवाह..और आपनें?

राम नाम जान्यो नहीं

राम नाम जान्यो नहीं-(प्रश्नोंत्तर)-ओशो भीतर के राम से पहचान-प्रवचन पहला प्रश्न-सार 1—आपने आज प्रारंभ होने वाली प्रवचनमाला को नाम दिया है: रामनाम जान्यो नहीं। क्या सच ही मृत्यु सिर्फ उनके लिए है जो राम को नहीं जानते हैं? इस राम को कैसे जाना जाता है? और पूजा क्या है? 2—आपको पांच वर्ष से पढ़ता-सुनता हूं और शिविर में भी भाग लेता हूं, लेकिन संन्यास नहीं ले पाया। मैं विचित्तरसिंह खानदान से हूं, लेकिन बहुत ही डरपोक हूं। मेरी समझ में कुछ नहीं आता। कृपा करके मार्ग-दर्शन करें। पहला प्रश्न: भगवान, रामनाम जान्यो नहीं, भई पूजा में हानि। कहि रहीम क्यों … Continue reading राम नाम जान्यो नहीं

देवता और प्रेतात्मातएं

यह देवता शब्‍द को थोड़ा समझना जरूरी है। इस शब्‍द से बड़ी भ्रांति हुई है। देवता शब्‍द बहुत पारिभाषिक शब्‍द है। देवता शब्‍द का अर्थ है……..इस जगत में जो भी लोग है, जो भी आत्‍माएं है। उनके मरते ही साधारण व्‍यक्‍ति का जन्‍म तत्‍काल हो जाता है। उसके लिए गर्भ तत्‍काल उपलब्‍ध होता है। लेकिन बहुत असाधारण शुभ आत्‍मा के लिए तत्‍काल गर्भ अपलब्‍ध नहीं होता। उसे प्रतीक्षा करनी पड़ती है। उसके योग्‍य गर्भ के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ती है। बहुत बुरी आत्‍मा, बहुत ही पापी आत्‍मा के भी गर्भ तत्‍काल उपल्‍बध नहीं होता है। उसे भी बहुत प्रतीक्षा करनी … Continue reading देवता और प्रेतात्मातएं

पतंजलि का चित्तवृत्ति निरोध

सम्राट पुष्पमित्र ने अश्वमेध—यज्ञ किया। यज्ञ की पूर्णाहुति हो चुकी थी, रात को अतिथियों के सत्कार में नृत्योत्सव था। जब यज्ञ के ब्रह्मा महर्षि पतंजलि उसमें उपस्थित हुए, तो उनके शिष्य चैत्र के मन में गुरु के व्यवहार के औचित्य के विषय में शंका—शूल चुभ गया। पतंजलि, योग—सूत्रों के निर्माता। जिन्होंने योग की परिभाषा ही की है. चित्तवृत्ति—निरोध। कि चित्त की वृत्तियों का निरोध हो जाए तो आदमी योग को उपलब्ध होता है। स्वभावत: उनका एक शिष्य चैत्र बड़ी शंका में पड़ गया कि गुरुदेव कहां जा रहे हैं? सम्राट ने उत्सव किया है रात, उसमें वेश्याएं नाचने वाली हैं। … Continue reading पतंजलि का चित्तवृत्ति निरोध

“वेद विश्वकोश (Encyclopedia) है !”

वेद में कहा है कि यज्ञ करो, तो ये फल होंगे। ऐसा दान करो, तो ऐसा स्वर्ग होगा। इस देवता को ऐसा नैवेद्य चढ़ाओ, तो स्वर्ग में यह फल मिलेगा। ऐसा करो, ऐसा करो, तो ऐसा-ऐसा फल होता है सुख की तरफ। वेद में बहुत-सी विधियां बताई हैं, जो मनुष्य को सुख की दिशा में ले जा सकती हैं। कारण है बताने का। वेद अर्जुन जैसे स्पष्ट जिज्ञासु के लिए दिए गए वचन नहीं हैं। वेद इनसाइक्लोपीडिया (encyclopedia) है, वेद विश्वकोश है। समस्त लोगों के लिए, जितने तरह के लोग पृथ्वी पर हो सकते हैं, सब के लिए सूत्र वेद … Continue reading “वेद विश्वकोश (Encyclopedia) है !”

अध्याय ४-९: यज्ञ का रहस्य

दैवमेवापरे यज्ञं योगिनः पर्युपासते। ब्रह्माग्नावपरे यज्ञं यज्ञेनैवोपजुह्वति।। २५।/ और दूसरे योगीजन देवताओं के पूजनरूप यज्ञ को ही अच्छी प्रकार उपासते हैं अर्थात करते हैं और दूसरे ज्ञानीजन परब्रह्म परमात्मा रूप अग्नि में यज्ञ के द्वारा ही यज्ञ को हवन करते हैं। यज्ञ के संबंध में थोड़ा-सा समझ लेना आवश्यक है। धर्म अदृश्य से संबंधित है। धर्म आत्यंतिक से संबंधित है। पाल टिलिक ने कहा है, दि अल्टिमेट कंसर्न। आत्यंतिक, जो अंतिम है जीवन में–गहरे से गहरा, ऊंचे से ऊंचा–उससे संबंधित है। जीवन के अनुभव के जो शिखर हैं, अब्राहिम मैसलो जिन्हें पीक एक्सपीरिएंस कहता है, शिखर अनुभव, धर्म उनसे संबंधित … Continue reading अध्याय ४-९: यज्ञ का रहस्य